Bhabhi ki Chudai
भाभी की पहली रात
जेठ जी के साथ भाभी की रोमांचक कहानी
मेरा नाम सीमा है और मैं अभी-अभी विवाह के बाद अपने पति के घर आई हूं। पति के भाई, राहुल, बहुत आकर्षक और मांसल जवान हैं। उनकी नज़रों में कुछ ऐसा है जो मेरे अंदर एक अलग ही खुजली पैदा करता है।
पहली रात को पति दफ्तर का काम लेकर घर देर से आने वाले थे। मैंने एक लाल नाइटी पहनी थी जो मेरे शरीर को सही तरह से उजागर करती थी। जैसे ही मैं रसोई में चाय बनाने गई, राहुल वहां आ गया।
"भाभी, इतनी देर से तो आप अभी तक सो नहीं गईं?" उसकी आवाज़ में एक अलग ही स्वर था।
"बस, कुछ काम बाकी था," मैंने जवाब दिया, लेकिन मेरी नज़र उसके शरीर पर टिकी रही। उसके सफेद कुर्ते के नीचे उसकी मांसल छाती दिख रही थी।
वह मेरे पास आ गया। "भाभी, आप बहुत सुंदर हो। अपने आप को खूब संभाल कर रखो।" उसका हाथ मेरी कमर पर आ गया।
मेरी सांसें तेज़ हो गईं। मुझे पता था कि ये गलत है, लेकिन मेरा शरीर इसके लिए चिल्ला रहा था। "राहुल... ये क्या...?"
"भाभी, मैंने तुम्हें देखा है। तुम भी मुझे देखती हो। क्यों न हम दोनों अपनी इस चाहत को पूरा करें?" उसके होंठ मेरे कान के पास आ गए।
मेरी पैंटी गीली हो गई। मैंने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन मेरे शरीर ने कुछ और ही संदेश दिया। मैंने उसकी तरफ देखा और फिर... उसके होंठ मेरे होंठों पर आ गए।
चुंबन गहरा होता गया। उसकी ज़बान मेरे मुंह में आ गई और मैं उसके साथ खेलने लगी। उसका हाथ मेरी नाइटी के अंदर चला गया और सीधे मेरे स्तनों को पकड़ लिया। मेरे निप्पल तुरंत कठोर हो गए।
"अरे... कोई देख लेगा," मैंने कहा, लेकिन मेरा शरीर उसके और करीब खिंच गया।
"घर में सब सो गए हैं। बस तुम और मैं," उसने मेरी नाइटी उतार दी। मैं पूरी तरह नंगी हो गई।
उसकी नज़र मेरे पूरे शरीर पर दौड़ गई। मेरी पूरी त्वचा कांपने लगी। उसने मुझे गोद में उठाया और बेड पर लिटा दिया। उसकी गरम सांसें मेरे चेहरे पर आ रही थीं।
उसका हाथ मेरी जाँघों के बीच चला गया। मेरी चूत पूरी तरह भीगी हुई थी। "अरे... इतनी जल्दी इतनी गीली हो गई?" वह मुस्कुराया।
"तुम मुझे पागल कर रहे हो," मैंने कहा। उसकी उंगलियां मेरी योनि के होंठों को अलग करने लगीं और सीधे मेरे क्लिट पर जाकर रगड़ने लगीं।
मेरी सांसें तेज़ हो गईं। मेरा शरीर उसकी उंगलियों के साथ नाचने लगा। "हाँ... वहीं... बस वहीं..." मैंने कहा।
वह मेरी योनि में उंगली डालने लगा। पहले एक, फिर दो, फिर तीन उंगलियां। मैं चिल्लाने लगी, लेकिन उसका दूसरा हाथ मेरे मुंह को बंद कर दिया।
"चुप रहो भाभी, नहीं तो सब जाग जाएंगे," उसने कहा।
उसकी उंगलियां मेरे अंदर तेज़ी से चलने लगीं। मेरी योनि का तरल पदार्थ उसके हाथ पर बह रहा था। मेरे शरीर में एक अलग ही आग जल रही थी।
अचानक उसने अपने कपड़े उतार दिए। उसका लिंग खड़ा था और बहुत बड़ा था। मेरी आँखें खुली रह गईं। "नहीं... ये... इतना बड़ा..." मैंने कहा।
"घबराओ मत, मैं धीरे करूंगा," वह मेरे पैरों को अलग कर गया। उसका लिंग मेरी योनि के प्रवेश द्वार पर आ गया।
"राहुल... प्लीज़... धीरे..." मैंने गिड़गिड़ाया।
उसने धीरे से अपना लिंग अंदर डाला। मेरी योनि उसे पूरी तरह निगल गई। हम दोनों एक साथ कराह उठे। "अरे भगवान... तुम कितनी तंग हो," वह मेरे कान में फुसफुसाया।
वह धीरे-धीरे चलने लगा। हर थ्रस्ट के साथ मेरी योनि खिंचती जाती थी। मेरी सांसें लड़खड़ाने लगीं। जब उसकी गति तेज़ हुई, तो मेरी चीखें निकल पड़ीं।
"हाँ... और जोर से... अंदर तक..." मैंने कहा। मेरी सारी शर्माई गायब हो गई।
"इसी चाहत के लिए तुम मेरे लिए प्रतीक्षा कर रही थीं, है न?" उसने मेरे कान में काटते हुए कहा।
"हाँ... हाँ... मैं तुम्हारा हूँ... पूरी तरह तुम्हारा," मैंने कहा।
उसकी गति और भी तेज़ हो गई। मेरा पूरा शरीर हिलने लगा। मैंने अपनी योनि में उसके लिंग को और गहरा जाने दिया। हम दोनों एक-दूसरे में पूरी तरह खो गए।
"मैं... मैं... आ रही हूँ," मैंने चेतावनी दी।
"हाँ... मेरे साथ आ," उसने कहा।
हमारे शरीर एक साथ कांपे। एक विस्फोटक संवेदना मेरे पूरे शरीर से गुज़र गई। मैंने उसके शरीर को और जोर से पकड़ लिया। उसका वीर्य मेरी योनि के अंदर भर गया।
हम दोनों पसीने में भीगे हुए, एक-दूसरे से लिपटे बेड पर पड़े थे।
"ये सिर्फ शुरुआत है, भाभी," उसने मेरे कान में कहा। "आगे तो और भी रोचक होगा।"
मैंने जाना था कि मेरी ये रात हमेशा के लिए मेरी ज़िंदगी बदल देगी...