GF ki Chudai

गर्लफ्रेंड की प्रेमिका

गर्लफ्रेंड की प्रेमिका मैं एक मकान मालिक हूँ और मेरे घर में एक नौकर काम करता है। उसका नाम राज है। वह बहुत सुंदर और मजबूत है। एक दिन मेरे पति ने शहर से बाहर जाने के लिए कहा। घर में सिर्फ मैं और राज थे। मैंने एक पतली साड़ी पहनी जो मेरे शरीर को पूरी तरह दिखाती थी। मैंने राज को चाय के लिए बुलाया। "राज, चाय बना दे," मैंने कहा। जब वह चाय लेकर आया, तो मैं सोफे पर बैठी थी, मेरी साड़ी मेरी जाँघों पर खिसक गई थी। "साहब... आप ठीक हैं?" राज ने पूछा। "हाँ... बस एक बात की कमी है," मैंने कहा। "क्या?" वह पूछा। "तुम्हारी," मैंने कहा। राज को समझने में देर नहीं लगी। "साहब... ये ठीक नहीं है। मैं नौकर हूँ।" "बिल्कुल ठीक है। आओ, मेरे साथ," मैंने उसे आमंत्रण दिया। "साहब... साहब गुस्से में आ जाएंगे," वह कहा। "तो क्या हुआ? मैं भी चाहती हूँ," मैंने कहा। राज मेरे पास बैठ गया। मेरा हाथ उसकी जाँघ पर आ गया। "राज... तुम कितने सुंदर हो।" मैंने उसकी पैंट के अंदर अपना हाथ डाला। उसका लिंग पहले से ही खड़ा था। "साहब... प्लीज़... ये ठीक नहीं है," वह कहा, लेकिन उसका शरीर कुछ और कहता था। मैंने उसकी पैंट उतारी। उसका लिंग मेरे सामने था - मोटा और लंबा। "भगवान... तुम कितने बड़े हो," मैंने कहा। मैंने उसे अपने मुंह में लिया। वह आवाज़ निकालता रहा। "साहब... ये... ठीक नहीं है... लेकिन... बहुत अच्छा लग रहा है।" मैंने उसके पूरे लिंग को अपने मुंह में लिया। उसकी गति तेज़ हो गई। जल्द ही उसका वीर्य मेरे मुंह में आ गया। "अरे... साहब... मुझे माफ कर दो," वह कहा। लेकिन मैंने उसे माफ नहीं किया। मैंने अपनी साड़ी पूरी तरह उतार दी और उसके ऊपर आ गई। "अब मेरी बारी है," मैंने कहा। मैंने उसके लिंग को अपनी योनि में डाल लिया। उसकी आँखें खुली रह गईं। "साहब... आप... तुम कितनी सुंदर हो," वह कहा। मैंने तेज़ी से ऊपर-नीचे करना शुरू किया। उसकी गति मेरे साथ चली। हमारे शरीरों की आवाज़ें घर को गूंजा देतीं। "हाँ... और... और... अंदर तक... हाँ," मैं चिल्लाई। वह मेरे शरीर को पूरी तरह अपना बना लिया। उसकी ताक़त और मेरी चाहत एक-दूसरे से मिल गए। जब हम दोनों चरम को प्राप्त हुए, तो बस एक ही शब्द निकला - आनंद।

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