Bhabhi ki Chudai
भाभी की पहली रात - Part 4: जोखिम की कीमत
भाभी की पहली रात - Part 4: जोखिम की कीमत
विक्रम की अचानक फोन कॉल आई। सीमा तब बिस्तर पर थी, राहुल के साथ, जब फोन बजा।
"सीमा, मैं कल रात को घर आ रहा हूँ। मेरी बैठक रद्द हो गई है।" विक्रम की आवाज़ फोन के माध्यम से आई। "मुझे तुम्हारी याद आ गई। घर आना चाहता हूँ।"
सीमा का पूरा शरीर ठंड हो गया। उसके हाथ कांपने लगे। "कल... कल रात को?"
"हाँ, लेट फ्लाइट है। कल सुबह 8 बजे पहुँच जाऊँगा।"
फोन कट गया। सीमा को लगा जैसे पृथ्वी उसके नीचे से खिसक गई। वह राहुल की ओर देखने लगी।
राहुल का चेहरा पीला पड़ गया। "भाभी... हम क्या करेंगे? अगर वह जान जाए, तो वह मुझे मार देगा। तुम्हें भी बर्बाद कर देगा। तुम्हारा कैरियर, तुम्हारी ज़िंदगी, सब कुछ खत्म हो जाएगा।"
"मुझे पता है," सीमा ने कहा, उसकी आवाज़ में डर और निर्णय दोनों थे। "लेकिन मैं तुम्हें खोना नहीं सकती, राहुल। मैं बस नहीं कर सकती। तुम मेरी ज़िंदगी का सब कुछ हो गए हो।"
वे रात भर जागते रहे, एक-दूसरे को गले लगाए हुए। सुबह जब विक्रम आया, तो सीमा ने उसे गले लगाया। लेकिन उसका गला सूखा हुआ था, उसकी आँखें सूजी हुई थीं।
"तुम ठीक हो? तुम अलग लग रही हो," विक्रम ने उसके चेहरे को देखा। उसकी नजर तीक्ष्ण थी, जैसे एक शिकारी जो शिकार को खोज रहा हो।
"नहीं... मैं बस थक गई हूँ। बस आराम की जरूरत है।"
लेकिन विक्रम का शक बढ़ता गया। वह सीमा को बहुत गौर से देखने लगा। उसके हर मूव को, उसके हर शब्द को, उसकी हर अभिव्यक्ति को।
दूसरे दिन, जब विक्रम नहा रहा था, तो राहुल के पाँव की आवाज़ सुनाई दी। सीमा के दिल की धड़कन तेज़ हो गई। वह जानती थी कि यह कितना खतरनाक था।
विक्रम ने नहाने वाले कमरे का दरवाज़ा खोला। राहुल सीधे सीमा के कमरे की ओर जा रहा था। बस कुछ पलों का ही फर्क था।
विक्रम ने तेज़ी से कपड़े पहने और सीमा के कमरे में घुस गया। राहुल ने दरवाज़ा खटखटाया।
"आओ," सीमा ने कहा, उसकी आवाज़ में भय था।
जब राहुल ने दरवाज़ा खोला, तो विक्रम पहले से ही कमरे में था। उसके चेहरे पर क्रोध की आग थी।
"राहुल... मेरे भाई, क्या कर रहे हो?" विक्रम की आवाज़ ठंडी थी, खतरनाक थी।
राहुल का चेहरा पीला पड़ गया। "साहब, मैं..."
"चुप रहो!" विक्रम ने चिल्लाया। "मेरी पत्नी। मेरी सम्मान। और तुम।"
विक्रम ने राहुल पर मुक्का बरसाने शुरू कर दिए। राहुल ने अपना सिर अपने हाथों में छुपा लिया।
"विक्रम... रुको! प्लीज़! यह मेरी गलती है। राहुल को मत मारो।" सीमा चिल्लाई, विक्रम के सामने झुक गई।
"तुम मेरी पत्नी हो। मेरी सम्मान हो।" विक्रम ने सीमा की ओर देखा, उसकी आँखें आग से भरी हुई थीं।
"मैं जानती हूँ," सीमा रोने लगी। "लेकिन मैं तुम्हें प्यार नहीं करती, विक्रम। मैं कभी तुम्हें प्यार नहीं कर सकती। मैं राहुल को प्यार करती हूँ।"
विक्रम को ऐसा लगा जैसे किसी ने उसके दिल पर चाकू मार दिया। वह चुप हो गया। उसकी क्रोध की आग धीरे-धीरे दुःख में बदल गई।
"घर छोड़ दो। दोनों। अभी," विक्रम ने धीरे से कहा।